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Reality of Intoxication (नशे की वास्तविकता) By Neeraj Kumar

                       Reality of Intoxication
Reality

Intoxication is that in which a person forgets his humanity and becomes a hero. Drug addiction forces a person to do what he should not do. A person ruins everything by getting drunk, a drunk person forgets the identity of good and bad. Drugs are of many types of substances which make the human body hollow and the person starts walking on the path of death.

There are many substances in which there is intoxication and when a person starts consuming those substances, then he starts getting intoxicated, which starts to sound like sleep or hearing in the human mind. Drugs are consumed with a variety of substances, including alcohol, which is consumed in the highest quantity.

 Thought

When there is sadness in the life of a person and he wants to forget his sadness, then he becomes intoxicated and moving. Many times, a person feels stressed due to some reason, even then to get rid of that stress, he gets drunk and takes his steps. Many times, a person gets intoxicated by seeing other intoxicants in the marriage ceremony and gets intoxicated in his daily life, which proves dangerous for him.

 It is not necessary to have drugs. When a person starts taking interest in a narcotic and continues to consume it, he gets used to that narcotic to such an extent. That for that he should put everything on his claim. So, addiction becomes necessary for that. We have seen some people living in our society, who have been wasting their lives in the habit of intoxication.

Bad habits

Drugs are used in many ways. Many people prefer to drink alcohol, so many humans consume other drugs. Those humans consume those drugs day and night, which prove very dangerous for them. They even put their future on the claim for that intoxicating substance, in which their life becomes a waste. Drug users have an impact on themselves as well as their family members and their friends. Drugs are the evil of society, which no one likes to embrace.

A person starts getting drunk, which no one has seen. A drunk person forgets to talk to his younger elders. Drugs make even the good of humans forget. A drunk person starts doing work that he should not do.

We must have seen such people in our society, who forget their rank and importance even when drunk. They even start saying bad things to others while intoxicated, and often do wrong actions due to intoxication, due to which other humans start making enemies with them. Even if the person is in any position.

Society starts boycotting drug users. Drugs are like the dirt for society, from which everyone likes to make distance. Often in youth, there is a fascination for drugs during adolescence and they get caught in the trap of drug addiction. Intoxication continues with them throughout their life, which is a fatal pang for puberty. They do not recognize the intoxication in adolescence and drown in their addiction, they should keep away from the drug at all times.

 

We must have seen such human beings in our society. People who consider their ideal and when they see them in a state of intoxication, then the heart of the people is broken that the one whom they had made their ideal turned out to be a tragedy and people would leave it as their ideal.

Intoxication is the most dangerous substance for anyone, no matter what it is. Stay away from intoxicants as much as possible. Drugs, family is never good for society. Every person who has an identity in society should stay away from addiction. = Intoxication is that in which a person forgets his humanity and becomes a hero. Drug addiction forces a person to do what he should not do. A person ruins everything by getting drunk, a drunk person forgets the identity of good and bad. Drugs are of many types of substances which make the human body hollow and the person starts walking on the path of death.

                                      नशे की वास्तविकता 

वास्तविकता

नशा वो होता है, जिसमे इन्सान अपनी इंसानियत को भुलाकर हैवान बन जाता है| नशे की लत इन्सान को वो काम करने पर मजबूर कर देती है, जो उसको नहीं करने चाहिए| इन्सान नशा करके अपना सब कुछ बर्बाद कर देता है, नशे में इन्सान अच्छे बुरे की पहचान तक भुला देता है| नशा कई तरह के पदार्थो का होता है जो मानव शरीर को खोखला कर देता है और इन्सान मृत्यु के मार्ग पर चलने लगता है|

कई ऐसे पदार्थ है जिनमे नशा होता है और जब इन्सान उन पदार्थो का सेवन करने लगता है तो उसको नशा होने लगता है, जो इन्सान के दिमाग में नींद जैसा या सुन  लगने लगता है| नशा कई तरह के पदार्थो से किया जाता है इसमें शराब भी शामिल है, जिसका सेवन सबसे अधिक मात्रा में किया जाता है| 

विचार 

जब किसी इन्सान के जीवन में उदासी आ जाती है और वो अपनी उदासी को भुलाना चाहता हो तो वो नशे की और अग्रसर होता है| कई बार इन्सान किसी कारण तनाव महसूस करता हो तब भी उस तनाव से निकलने के लिए वो नशे की और अपने कदम बढाने लगता है| कई बार इन्सान शादी समाहरो में दुसरे नशा करने वालो को देखकर भी नशा करने लगता है और अपने दैनिक जीवन में नशे की आदत बना लेता है, जो उसके लिए खतरनाक साबित होती है|

नशा करना जरुरी नहीं है| जब कोई इन्सान किसी नशीले पदार्थ में रूचि लेने लगे और लगातार उसका सेवन करता रहे उसको उस नशीले पदार्थ की आदत इस हद तक लग जाए| की उसके लिए वो अपना सब कुछ दाव पर लगा दे| तो उसके लिए नशा जरुरी हो जाता है| हमने अपने समाज में रहने वाले, कुछ ऐसे इन्सान देखे होंगे जो नशे की आदत में अपना जीवन तक बर्बाद कर बैठे है| 

नशे की बुरी आदतें  

नशा कई तरह से किया जाता है| कई इन्सान शराब पीना ज्यादा पसंद करते है, तो कई इन्सान दुसरे नशीले पदार्थ का सेवन करना| वो इन्सान उन नशीले पदार्थो का सेवन दिन रात करते है, जो उनके लिए बहुत खतरनाक साबित होते है| वो उस नशीले पदार्थ के लिए अपने भविष्य तक को दाव पर भी लगा देते है, जिसमे उनके जीवन की बर्बादी हो जाती है| नशा करने वाले इन्सान अपने साथ साथ अपने परिवार के सदस्यों पर भी और अपने दोस्तों पर प्रभाव डालते है| नशा समाज की वो बुराई है, जिसको कोई गले लगाना पसंद नहीं करता|

नशे में इन्सान का वो रूप बाहर निकलने लगता है, जिसको किसी ने नहीं देखा होता| नशे में इन्सान अपने छोटे बड़ो से भी बात करना भूल जाता है| नशा इन्सान की भलाई तक को भुलवा देता है| नशे में इन्सान वो काम करने लगता है, जिसको उसे नहीं करना चाहिए|

हमने अपने समाज में ऐसे इन्सान देखे होंगे, जो नशे में अपनी पदवी और अहमियत तक को भूल जाते है| वो नशे में दुसरो को भला बुरा बोलना तक शुरू कर देते है और कई बार नशे के कारण गलत हरकते तक कर डालते है, जिससे दुसरे इन्सान उनसे दुरी बनाना शुरू कर देते है| चाहे वो इन्सान किसी भी पदवी पर ही क्यों ना हो |

समाज, नशा करने वाले इंसानों का बहिष्कार करना शुरू कर देता है| नशा समाज के लिए उस गंदगी की तरह होता है, जिससे हर कोई दुरी बनाना पसंद करता है| अक्सर युवाओं में किशोरावस्था के दौरान नशे के लिए आकर्षण होता है और वो नशे के आकर्षण के जाल में फंस जाते है| नशा जीवन भर उनके साथ साथ चलता रहता है, जो युवावस्था के लिए घातक शिद्घ होता है| वो किशोरावस्था में नशे को नहीं पहचान पाते और उसकी लत में डूबते जाते है, उनको नशे से हर हाल में दूर रहना चाहिये|

हमने अपने समाज में ऐसे इन्सान देखे होंगे| जिनको लोग अपना आदर्श मानते हो और जब उनको नशे की हालत में देखते है तो लोगो का दिल टूट जाता है की उन्होंने जिसको अपना आदर्श बनाया था वो एक नसेडी निकला और लोग उसको अपना आदर्श मानना छोड़ देते|

निष्कर्ष

नशा कोई भी, किसी का ही, क्यों ना हो, वो जीवन के लिए सबसे खतरनाक पदार्थ है| जितना हो सके नशे के पदार्थो से दूर रहना चाहिए| नशा, कभी भी परिवार समाज के लिए अच्छा नहीं होता| नशे से हर उस इन्सान को दूर रहना चाहिए, जो समाज में अपनी एक पहचान रखता हो|


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