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Reality of Question and dialogue (सवाल और संवाद की वास्तविकता)By Neeraj kumar

 

सवाल और संवाद की वास्तविकता

वास्तविकता 

कहते है संवाद ही सवालों के जवाब जानने का सही तरीका होता है सवाल ही संवाद को उजागर करते है यदि सवाल नहीं होते तो संवाद भी नहीं होते संवाद से सवाल का महत्व होता है| और सवाल ही संवाद के लिए रास्ता बनाता है संवाद के बिना हर वो सवाल अधुरा होता है जिसमे संवाद न हुआ हो| और हर वो संवाद अधुरा होता है जिसमे कोई सवाल छुपा ना हो इसलिए हर सवाल का सही परिचय संवाद से ही होना चाहिए| जो सवाल के महत्व को बढ़ा देता है

सवाल और संवाद का विचार

सवाल और संवाद उसको कह सकते है जिसमे दो या दो से अधिक इंसानों के द्वारा उस सवाल का सही परिचय दिया गया हो या उस सवाल के उत्तर की महत्वकांक्षा का पता चलता हो| जो संवाद से होकर दुनिया के सामने आता है| उसको हम संवाद और सवाल का विचार कह सकते है| हर उस विषय, वस्तु के बारे में जानने की जिज्ञासा ही हमारा सवाल बन जाता है और उस सवाल को कितने प्रकार के विचारो से होकर जाना पढता है वो संवाद बन जाता है|  

सवाल और संवाद का महत्व

इस दुनिया में लाखो सवाल हुए जिनको किसी ना किसी संवाद के जरिये उसका उत्तर मिला और आज भी दुनिया के सामने लाखो ऐसे सवाल है| जो किसी ना किसी संवाद को उजागर करते है| जिससे उस सवाल का सही उत्तर मिल सकता है| संवाद कोई आज का विषय नहीं है जो किसी ना किसी सवाल के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है संवाद का जन्म भी तभी होता है जब सवाल का जन्म होता है जैसे जैसे सवालों के लिए संवाद बढ़ते जाते है उस सवाल की रूप रेखा सामने आने लगती है जो दुनिया के लिए उस सवाल का महत्व समझाती है |


कभी कभी हम देखते है की सवालों के संवाद को लेकर समाज में एक जिज्ञासा सी बढती जाती है हमने बहुत बार देखा होगा की संवाद कई बार दुसरे नए सवाल भी खड़े कर देते है जबकि जिस सवाल को लेकर संवाद हुआ था उसका जवाब मिला हो या नहीं मिला हो| जैसे एक इन्सान दुसरे इन्सान के जन्म का जरिया बनता है उसी तरह एक सवाल भी दुसरे सवाल का जरिया बनता है जो एक नए संवाद के लिए होता है|


जब हम सवाल और संवाद के महत्व को समझते है तो विचारो में टकराव होता है जब विचार एक दुसरे से टकराते है तो संवाद होता है जो सवाल की रूप रेखा को निखारता है सवाल आसान हो या सवाल मुश्किल हो| उसके पीछे संवाद जरुर होता है कभी कभी सवालों के जवाब आसानी से मिल जाते है| और कई सवालो के जवाब तलाशने में काफी मुश्किल आती है और उन मुश्किलों का हल ही संवाद खोजता है|

निष्कर्ष

इन्सान को कभी भी सवाल के पीछे छिपे संवाद से नहीं हटना चाहिए क्योकि संवाद से उस सवाल का जवाब तो सामने आता ही है बल्कि दुनिया में विचारो के मतभेदों को सुलझाने का रास्ता भी साफ़ दिखता है इस लिए संवाद ही सही तरीका होता है सही सवाल का जवाब जानने का|



Reality of Question and dialogue 

The Reality 

It is said that dialogue is the right way to know the answers to the questions. The question itself exposes the dialogue. If there are no questions, then there is no dialogue. The dialogue has importance. And the question itself makes way for dialogue. Without dialogue, every question that is not communicated is incomplete. And every dialogue is incomplete in which no question is hidden, so every question should be properly introduced by the dialogue. Which increases the importance of the question

Question and thought of dialogue

Questions and dialogues can be told in which the correct introduction of that question has been given by two or more humans or the aspiration of the answer to that question is revealed. Which comes to the world through dialogue. We can call him the idea of ​​dialogue and question. The curiosity to know about each and every subject and subject becomes our question and how many kinds of thoughts that question has to go through become a dialogue.

Importance of questions and communication

There were millions of questions in this world, which got its answer through some dialogue and even today there are millions of such questions in front of the world. Which highlight some dialog. Which can give the correct answer to that question. Dialogue is not a today's topic that has played an important role for some question, dialogue is also born only when the question is born as the dialogue progresses for the questions, the question line starts coming up Which explains the importance of that question for the world.


Sometimes we see that there is a growing curiosity in the society about the communication of questions, we must have seen many times that the dialogues sometimes raise other new questions even if the question about which the dialogue was done has got an answer or not. Have got Just as a human being becomes the source of another person's birth, similarly a question also becomes a means for another question for a new dialogue.


When we understand the importance of questions and dialogue, then there is a conflict in thoughts. When ideas collide with each other, then there is dialogue which enhances the design of the question. The question should be easy or the question is difficult.

     

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