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Reality of heart and mind(दिल और दिमाग की वास्तविकता ) By Neeraj kumar

दिल और दिमाग की वास्तविकता 

वास्तविकता

इन्सान के सीने में लगातार धडकने वाला दिल जो कभी नहीं रुकता और इन्सान के मस्तिष्क  में सोचने वाला दिमाग जो लगातार कुछ ना कुछ सोचता रहता है| दिल और दिमाग को इन्सान की सबसे बड़ी ताकत समझा जाता है और सबसे बड़ी कमजोरी भी समझा जाता है| जब इन्सान अपने कार्यो में दिल और दिमाग दोनों लगा लेता है तो उसको कामियाब होने से कोई नहीं रोक सकता| कहते है कार्यो में दिल लगाकर काम करना और दिमाग लगाकर कार्यो के लिये सोचना ही उसकी कामियाबी का रास्ता होता है| दिल को एक इन्सान से दुसरे इन्सान के शरीर में बदल सकते है तो दिमाग को अभी तक ऐसे बदलने की कोई पद्धति सामने नहीं आई है| कहते है दिल और दिमाग के लिए बने हजारो मुहावरे भी है जिनको अक्सर इन्सान अपनी बातो में इनका इस्तेमाल करता रहता है|     

 

दिल और दिमाग का विचार

इन्सान के जन्म के साथ ही उसका दिल और दिमाग दोनों ही कार्य करने लग जाते है यदि दोनों में से किसी में भी कार्य करना कम या छोड़ दिया होता है तो इन्सान के जीवन के लिए हानिकारक हो जाता है इन्सान के जीवन में दिल और दिमाग दोनों का ही संतुलन स्वस्थ शरीर के लिए अच्छा समझा जाता है दोनों को ही सही तरीके से कार्य करना पढता है| दिमाग को सोचने की शक्ति प्राप्त है तो दिल को महसूस करने की शक्ति प्राप्त है दिल को धडकते हुये महसूस कर सकते है तो दिमाग के लिए सोच विचार कर सकते| लेकिन दोनों के ही कार्य अलग अलग है और दोनों ही शरीर के लिए जरुरी होते है| हमदर्दी, एहसास, लगाव, ममता, के लिए दिल को इसका जिम्मेदार माना जाता है| तो ज्ञानी, तेज, चतुर चालाक, के लिए दिमाग को इसका जिम्मेदार माना जाता है|    

दिल और दिमाग का महत्व

दिल और दिमाग को जितना कमजोर समझा जाता है तो उतना ही दिल और दिमाग को मजबूत समझा जाता है| किसी इन्सान का दिल कमजोर होता है तो किसी इन्सान का दिल बहुत मजबूत होता है तो कभी किसी इन्सान का दिमाग कमजोर होता है तो किसी का दिमाग बहुत मजबूत होता है इन्सान कभी दिल के एहसासों को गंभीरता से लेता है| और दिमाग को नहीं लगाता| तो कभी इन्सान दिमाग से चालाकी दिखाता है तो दिल नहीं लगाता| दिल और दिमाग इन्सान के कार्यो के लिए कमजोरी भी हो सकती है और ताकत भी हो सकती है| प्यार और नफरत के लिए दिल का ज्यादा प्रयोग किया जाता है तो ज्ञानी और मुर्खता के लिए दिमाग को रखकर देखते है| प्यार की कहावतो में भी दिल की शायरियो को ज्यादा लिखा गया है तो दिमाग को कार्य कुशलता के लिए लिखा गया है|  

 

इन्सान के शरीर में दिल ही एक ऐसा है जो हमेशा धडकता रहता है| जबकि दिमाग को इतना कार्य नहीं करना पढता| वो अपने हिसाब से कार्य कर सकता है| दिमाग का तेज  समझा जाना बहुत अच्छी बात समझी जाती है| तो दिल का अच्छा होना बहुत बड़ी बात समझी जाती है कभी कोई दिमाग से कमजोर होता है| तो उसको अलग अलग तरह की संज्ञा दी जाती है दिल की कमजोरी भी इन्सान के लिए घातक समझी जाती है|  

 

इन्सान अपने जीवन में कई विषयों को दिल से महसूस करता है| जबकि उसके पीछे इन्सान के दिमाग की ताकत होती है जिस विषय में इस तरह की बातो को रखा करता है| यदि वो ऐसा करता है| तो उसका दिमाग परेशानियों से घिर जाता है और वो अपने दुसरे कार्यो के लिए सोच विचार के लिए तैयार नहीं होता| वही दूसरी तरफ यदि दिमाग के कार्यो को दिल से करता है तो तब भी परेशानियों से घिर जाता है| दोनों का ही इस्तेमाल और कार्य कुशलता अलग अलग होती है|

निष्कर्ष

दिल और दिमाग दोनों के कार्य अलग अलग है और दोनों को ही सही तरीके से काम करना चाहिए ना दिल के लिए कुछ ऐसा कार्य करना चाहिए जो उसको नुकसान पहुचाये और ना ज्यादा दिमाग में कुछ ऐसा रखना चाहिए जो उसको नुकसान पहुचाये दोनों ही इन्सान के शरीर के लिए सही रहने चाहिए|



Reality of heart and mind

The reality

A heart that never stops in the cine of a human who never stops and a brain thinking in the mind of a human who constantly thinks something or the other. Heart and mind are considered to be the greatest strength of man and the biggest weakness. When a person puts both his heart and mind into his work, no one can stop him from being successful. It is said that working diligently in the works and thinking for the works with the mind is the way to his weakness. If you can change the heart from one person to another, then no method of changing the mind has been revealed so far. It is said that there are thousands of idioms for the heart and mind, which are often used by humans in their talks.

Thoughts of heart and mind

With the birth of a human being, both his heart and brain start working, if either of them is reduced or left to work, then it becomes harmful to the life of human being. The balance of the body is considered good for a healthy body, both of them have to study properly. If the mind has the power to think, then the heart has the power to feel, the heart can feel the beating, then the mind can think for thought. But both have different functions and both are necessary for the body. Heart is considered responsible for empathy, feeling, attachment, affection, love. So knowledgeable, sharp, clever, clever is considered to be responsible for this.

Importance of heart and mind

The weaker the heart and mind are considered, the stronger the heart and mind are considered. If a person's heart is weak, then a person's heart is very strong, sometimes a human's mind is weak, then a person's mind is very strong. And do not engage the mind. Sometimes if a person is manipulated by his mind, he does not attach his heart. There can be weakness and strength for the heart and mind of human beings. Heart is used more for love and hate, then we keep the mind for wisdom and foolishness. Even in the proverbs of love, the poets of the heart have been written more so the mind has been written for efficiency.


In the body of a person, the heart is the one that always blasts. Whereas the mind does not have to read so much work. He can work on his own. It is considered a very good thing to have a sharp mind. So the goodness of the heart is considered a big thing, sometimes someone is weaker than the mind. So it is given different types of noun, weakness of heart is also considered fatal for human being.


A person realizes many subjects in his life by heart. While behind it is the power of the human mind, in which subject such things are kept. If he does. So his mind is slowed by troubles and he is not ready to think for his other tasks. On the other hand, if you do the work of the brain with the heart, then it is still patient with problems. The use and efficiency of both are different.

The conclusion

The work of both the heart and the mind is different and both should work in the right way, nor should they do something for the heart that would harm them and neither should there be anything in the mind that can harm them, both the body of the human being. Should be right for



              


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