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Reality of greed and remorse(लालच और पछतावे की वास्तविकता) By Neeraj kumar

 

लालच और पछतावे की वास्तविकता

वास्तविकता

लालच और पछतावा दो ऐसे भाव है जो इन्सान के मन में ही होते है लेकिन ये भाव कभी किसी को नहीं दिखते| कभी कभी इन्सान कुछ विषय वस्तुओ के लिए लालच रखता है तो कभी कभी ज्यादा लालच इन्सान को पछतावे के लिए मजबूर कर देता है| कहते है लालच उतना ही अच्छा होता है जहाँ तक पूरा हो जाये| यदि ज्यादा लालच हो तो वो पछतावे के लिए हो जाता है दुनिया में कही ना कही, किसी ना किसी का, कोई ना कोई, लालच ज़रुर छुपा होता है और वो अपने उस लालच के लिए लगातार कार्य करता रहता है| कभी उस इन्सान का लालच पूरा हो जाता है| तो कभी कभी इन्सान ज्यादा लालच के भँवर में फंस जाता है| और बाद में उसको पछताना पढता है|

लालच और पछतावे का विचार

लालच और पछतावे का भाव इन्सान की प्रतिक्रिया को देने पर मजबूर कर देता है| इन्सान को बहुत से विषय वस्तुओ के लिए लालच हो सकता है कोई नाम के लालच में रहता है तो कोई पैसो के लालच में, कोई पद प्रतिष्ठा के लालच में होता है तो कोई दूसरी वस्तुओ के लिए लालच रखता है| पछतावे को भी बहुत सी चीजो व् विषय वस्तुओ के लिए होना पढता है| लालच ख़ुशी के भाव को महसूस कराने की कोशिश करता है तो पछतावा दुःख के भाव को महसूस करवाने की कोशिश करता है| यदि कभी इन्सान का लालच पूरा नहीं होता तो वो उस विषय वस्तु के लिए पछतावे को महसूस करता है| और कभी लालच में फस कर पछताना भी पढता है| यदि कभी इन्सान का एक लालच पूरा होता है तो उसके लिए वह  ख़ुशी महसूस करवाता है और वह दूसरा लालच करने लग जाता है| लालच भी दो तरह के हो सकते है एक लालच अच्छाई का हो सकता है तो दूसरा लालच बुराई का हो सकता है| इन्सान को ये समझना होगा की उसका भाव किस तरह के लालच को देखा रहा है|

लालच और पछतावे का महत्व

लालच का कोई महत्व नहीं होता लेकिन पछतावे का बहुत महत्व होता है जब भी इन्सान किसी विषय वस्तु या गलती के लिए पछतावा करता है| तो वो इन्सान सामने वाले से इसका पछतावा कर सकता है| लेकिन इन्सान अपने लालच के लिए कभी भी किसी दुसरे इन्सान से इसका इज़हार नहीं करता| की मेरा इसमें लालच छुपा है| इन्सान की सोच में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लालच शामिल होते है वो किस तरह के लालच के लिए अपने आप को प्रदर्शित करता है| ये वही इन्सान बता सकता है| जो लालच कर रहा है|

 

कभी कभी इन्सान अपने लालच में दुसरे इन्सान को चोट या नुकसान भी कर देता है वो सिर्फ और सिर्फ ऐसा अपने लालच के कारण करता है| क्योकि उस इन्सान का लालच इतना बढ़ चूका होता है की उसको सोचने समझने की शक्ति खत्म हो चुकी होती है| उसके सामने उस विषय वस्तु का लालच ही होता है जिसके लिए उसने दुसरे इन्सान को नुकसान या चोट पहुचाई|

 

कभी कभी इन्सान उन विषय वस्तुओ के लिए पछतावे को महसूस करता है| जिसके लिए वो लालच करता था पछतावा करना भी इन्सान की सबसे बढ़ी खूबियों में से एक को समझ सकते है क्योकि लालच के बाद पछतावे का करना किसी किसी इन्सान में देखा गया है| जो अपने आप को लालच के लिए शर्मिंदा मानता हो और वो इसके लिए पछतावा करता हो| लालच भी इन्सान का वो भाव है जो हर समय किसी ना किसी रूप में सामने आता रहता है|

निष्कर्ष

इन्सान को जीवन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लालच शामिल होते है और इन्सान को पछतावा भी अच्छे और बुरे कार्यो के लिए होता है अच्छे कार्यो का लालच कभी भी पछतावा नहीं देता लेकिन बुरे कार्यो का लालच हमेशा पछतावा देता है|



Reality of greed and remorse

The reality

Greed and remorse are two emotions that are in the mind of a person, but these expressions are never seen by anyone. Sometimes a person has greed for certain subjects, sometimes more greed forces a person to regret it. It is said that greed is as good as it gets. If there is more greed then it becomes for repentance, anywhere in the world, someone, someone or other, greed must be hidden and he works continuously for that greed. Sometimes the greed of that person is fulfilled. So sometimes the person gets trapped in the whirlpool of greed. And later read it repenting.

Thoughts of greed and remorse

A sense of greed and remorse forces a person to respond. A person may have a greed for many things, someone lives in the greed of a name, someone greed for money, a position in the greed of prestige, and someone greed for other things. Regrets also have to be read for many things and subjects. When greed tries to make the feeling of happiness, regrets try to make the feeling of grief. If the greed of man is never fulfilled, he feels remorse for that subject matter. And sometimes read greedily repented. If ever a person's greed is fulfilled, he feels happy for it and he starts greed for another. Greed can also be of two types, one can be of good, then the other can be of evil. A person has to understand what kind of greed he is seeing.

Importance of greed and remorse

Greed is of no importance but repentance has great significance whenever a person regrets for a subject matter or mistake. So that person can regret it from the front. But man never expresses it to any other person for his greed. That my greed is hidden in it. Both good and bad greed are involved in the thinking of a person. He shows himself to what kind of greed. This same person can tell. Who is greed

 

Sometimes a person in his greed hurts or damages another person only and only because of his greed. Because the greed of that person has increased so much that the power to think and understand it is over. In front of him is the greed of the subject matter for which he has hurt or hurt another person.

 

Sometimes a person feels remorse for those things. For which he used to covet, repentance can also be understood as one of the greatest qualities of human being, because repentance after greed has been seen in a human being. He who considers himself ashamed of greed and regrets it. Greed is also the feeling of human being that comes out in some form or the other all the time.

The conclusion

A person has both good and bad greed in his life and a person has regrets for good and bad deeds. Greed for good deeds never regrets, but greed for bad deeds always regrets.

 

 

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