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The Reality of fools and the wise(मुर्ख और ज्ञानी की वास्तविकता) By Neeraj kumar

 

मुर्ख और ज्ञानी की वास्तविकता

वास्तविकता

इन्सान अपने विचार, अपनी सोच, अपने व्यवहार से समाज में अपने आप को मुर्ख या ज्ञानी साबित कर सकता है| वो कितना मुर्ख है या कितना ज्ञानी है ये उसके विचार और व्यवहार और उसकी सोच बता देती है| दुनिया भी बखूबी जानती है की मुर्ख की क्या विशेषता होती है और ज्ञानी की क्या विशेषता होती है| जबकि मुर्ख कभी भी अपने आपको मुर्ख नहीं मानता और ज्ञानी कभी भी अपने आपको ज्ञानी नहीं मानता| दोनों के व्यक्तित्व में बढ़ा अंतर  देखने को मिलता है| मुर्ख कभी भी अपनी गलती नहीं स्वीकारता तो ज्ञानी अपनी गलती स्वीकार कर लेता है और उस गलती से सबक लेकर सीखने की कोशिश करता है| मुर्ख भी कही ना कही अपनी मुर्खता का सबूत देता रहता है| जिससे दुनिया की नजर में उसके व्यक्तित्व की पहचान मुर्खता को लेकर की जाती है| जबकि ज्ञानी कभी भी अपने ज्ञान का परिचय नहीं देता दुनिया की नजर में ज्ञानी की पहचान उसके विचार उसकी सोच उसके व्यवहार और उसके ज्ञान के कारण ही बनी रहती है|

मुर्ख और ज्ञानी का विचार

इन्सान की मुर्खता और ज्ञानता के बीच का अंतर ही सबसे बड़ा कारण है मुर्ख अपनी कई तरह की विशेषता को दुनिया के सामने एक के बाद एक रखता रहता है| और ज्ञानी अपनी कई तरह की विशेषता को दुनिया के सामने प्रदर्शित ही नहीं करता| मुर्ख अपनी मुर्खता के कारण अपने अहंकार के आगे कभी अपनी गलती स्वीकार नहीं करता| जबकि ज्ञानी अपने ज्ञान को और बढ़ाने के लिए अपनी गलती को स्वीकार करता है| और उस गलती में सुधार करके अपने ज्ञान में एक और बढ़त करता है| मुर्ख हमेशा जल्दी में रहता है जबकि ज्ञानी अपने कार्यो में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाता मुर्ख की बाते दुनिया सुनना पसंद नहीं करती जबकि ज्ञानी की बातो को दुनिया पुरे ध्यान से सुनी जाती है| मुर्ख गम्भीर विषयों में भी गंभीरता नहीं दिखाता जबकि ज्ञानी अपने हर विषय में गंभीरता को दिखाता है| मुर्ख एक ही गलती को बार बार करता चला जाता है जबकि ज्ञानी अपनी एक ही गलती से सबक लेकर गलती में सुधार करता है| मुर्ख झूठ का सहारा लेकर अपने वर्चस्व को बनाने की कोशिश करता है जबकि ज्ञानी झूठ को त्यागता है और सच के सहारे ही अपने वर्चस्व को बनाता है| मुर्ख कल्पनाओं में वास्तविकता को तलाशने की कोशिश करता है| जबकि ज्ञानी वास्तविकता पर ही कार्य करने की कोशिश करता है|

मुर्ख और ज्ञानी का महत्व

दुनिया में बहुत से ज्ञानी इन्सान हुए है जो अपने ज्ञान से दुनिया को कई तरह के आविष्कारों से उजागर कर गए| ज्ञानी इन्सान की पहचान दुनिया के इतिहास में एक बड़ी पहचान बनती है जिसको दुनिया आसानी से भुला नहीं पाती| आज भी दुनिया में बहुत से इन्सान है जो अपने क्षेत्र में नए तरह के ज्ञान से दुनिया को रोशन कर रहे है| और इसी तरह आगे भी ज्ञानी इन्सान अपने ज्ञान से दुनिया को ज्ञान देते रहेंगे| ज्ञानी की विशेषता होती है की दुनिया खुद ही उसके ज्ञान पर तर्क वितर्क करते रहते है| ज्ञानी के हालात और स्थिति किसी भी तरह की क्यों ना हो वो अपने ज्ञान से बड़े से बड़े पद प्रतिष्ठा के लिए योग्य साबित हो जाते है|

 

वही मुर्ख की भी विशेषता होती है दुनिया के सामने बहुत से मुर्ख इन्सान हुए है जो दुनिया के लिए एक समस्या खड़ी करते रहते है| यदि किसी मुर्ख इन्सान के हाथ में कोई विशेष पद भी होता है तो वो अपनी मुर्खता से उस पद की प्रतिष्ठा को भी गिरा देते है मुर्ख इन्सान  हमेशा ये समझते है की जो ज्ञान मुझमे है वो किसी में भी नहीं मुर्ख इन्सान आसानी से किसी की भी बातो में आ जाते है| वो ना तो किसी बात की खोज करते है और ना ही वो अपने तर्क और तथ्यों से दुनिया को प्रभावित करते है| कही ना कही किसी ना किसी को मुर्ख देखने को मिल ही जाता है लेकिन उसकी विशेषता ही ये साबित कर देती है की वो मुर्ख है|

 

निष्कर्ष

दुनिया के सामने मुर्ख भी होते है और ज्ञानी भी होते है यदि इन्सान मुर्ख की संगत को अपनाता है तो मुर्ख ही कहलाता है और यदि इन्सान ज्ञानी की संगत अपनाता है तो ज्ञानी कहलाता है| 

The Reality of fools and the wise

The reality

A person can prove himself foolish or knowledgeable in society by his thoughts, his thinking, his behavior. How foolish or knowledgeable he is, it tells his thoughts and behavior and his thinking. The world also knows very well what is the specialty of a fool and what is the specialty of a wise. Whereas a fool never considers himself a fool and a learned man never considers himself a fool. There is a big difference in the personality of both. The fool never accepts his mistake, then the wise man accepts his mistake and tries to learn from that mistake. The fool also keeps giving evidence of his foolishness somewhere. In the eyes of the world, his personality is identified with foolishness. Whereas the knower never shows his knowledge, in the eyes of the world, the identity of the knower remains due to his thoughts, his thinking, his behavior and his knowledge.

Thought of fools and the wise

The biggest reason is the difference between the foolishness and wisdom of a human being. And the knowledgeable does not show many of his specialties to the world. A fool never accepts his mistake in front of his ego because of his foolishness. Whereas the knower admits his mistake to further increase his knowledge. And by correcting that mistake, he adds another edge to his knowledge. A fool is always in a hurry while a wise does not show any haste in his works. Murk does not show seriousness even in serious subjects, whereas a learned person shows seriousness in every subject. The fool goes on to make the same mistake again and again, while the learned learns from the same mistake and corrects the mistake. A fool tries to build his supremacy by resorting to falsehood, while a wise man renounces lies and builds his supremacy only with the help of truth. A fool tries to find reality in fantasies. Whereas the knower tries to act only on reality.

Importance of  fools and the wise

There have been many knowledgeable humans in the world, who by their knowledge have exposed the world to many kinds of inventions. The identity of a knowledgeable person becomes a major identity in the history of the world, which the world cannot easily forget. Even today there are many human beings in the world who are illuminating the world with new types of knowledge in their fields. And in the same way, knowledgeable humans will continue to give knowledge to the world with their knowledge. The knowledgeable quality is that the world itself continues to argue on its knowledge. No matter what kind of situation and status of the knowledgeable person, by his knowledge, the biggest posts prove worthy of prestige.

 

The same fool has a specialty, many fools have been exposed to the world, who continue to pose a problem for the world. If a foolish person also has a special position in his hand, then he also declines the status of that position with his foolishness. A foolish person always understands that the knowledge that is in me is not easy for anyone but a foolish person easily Come to talk. They neither search for anything nor do they affect the world with their logic and facts. Somewhere, someone gets to see a fool, but his specialty proves that he is a fool.

 

The conclusion

There are fools in front of the world and they are also knowledgeable. If a person adopts the company of a fool, then it is called a fool and if a person adopts a partner of a knowledgeable, then it is called a gyani

 

 

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