Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2021

Reality of childhood and old age(बचपन और बुढ़ापे की वास्तविकता) By Neeraj kumar

  बचपन और बुढ़ापे की वास्तविकता वास्तविकता   इन्सान के जीवन में बचपन का ही एक ऐसा समय होता है जो हर गम दुःख मुसीबत और चुनौतियों से बेखबर होता है हर वो इन्सान जो बुढापे में पहुँच चूका हो| जिसने अपने जीवन को अच्छे या बुरे दौर से बिता रहा हो| वो अपने बचपन को हमेशा याद करता है| बचपन की यादें हर इन्सान के जीवन की यादगार पल होते है और वो कभी भी अपने बचपन के बिताये गए पलो को याद करके कभी ख़ुशी महसूस कर लेता है तो कभी दुःख महसूस कर लेता है बचपन से बुढ़ापे तक पहुचने के लिए इन्सान को एक उम्र की समय सीमा बितानी पढ़ती है, उसके बाद ही उस इन्सान के बचपन से बुढ़ापे के सफर तक पहुच पाता है| बचपन चुस्ती-फुर्ती खेल कूद और उत्साह से भरा होता है तो बुढ़ापा जिम्मेदारियों और कमजोरियों से घिरा जीवन होता है| बचपन और बुढ़ापे का विचार इन्सान जो अपने बचपन में सीखता है वो उसके बुढ़ापे तक काम आता है चाहे वो सीखे गए संस्कार हो या सीखे गए व्यवहार हो| बचपन में सीखी गई आदते अच्छी हो या बुरी वो आदते बुढ़ापे तक बनी रहती है| कभी कभी इन्सान बचपन की आदतों को छोड देता है| तो कभी बचपन की आदते बुढ़ापे तक नहीं रहती| जीवन में बच

The reality of creations and mysteries( रचनाये और रहस्य की वास्तविकता )By Neeraj kumar

  रचनाये और रहस्य की वास्तविकता  रहस्य वो होता है जिसको इन्सान समझने में असमर्थ सा दिखता है| रहस्यों को जानना उनको समझना इन्सान की सबसे बड़ी खोज मानी जाती है| दुनिया में ऐसे रहस्य है जिनको आज तक इंसानों के द्वारा समझा नहीं गया| ईश्वर ने धरती पर कुछ रचनाये इस तरह की है| वो आज भी एक रहस्य बनी हुई है यदि इन्सान उन रचनाओ के रहस्यों को जानने का प्रयास करता है तो उसको हमेशा असफलता ही हाथ लगती है| दुनिया में बहुत से ऐसे विषय वस्तु है| जिनकी रचनाये देखकर इन्सान आज भी नहीं समझ पाता की इसके पीछे ऐसे क्या रहस्य हो सकते है| जो इन्सान को सोचने पर मजबूर कर देते है| रहस्य एक ऐसा विषय जिसको समझना हर वो इन्सान चाहता है| जो किसी विषय वस्तु की रचना को देखकर अचंभित हो जाता है| की इसका निर्माण किस तरह किया गया होगा या हुआ होगा| उन रहस्यों को जानना ही इन्सान की सबसे बड़ी जिज्ञासा को बढ़ाती है| रचनाये और रहस्य का विचार इन्सान बहुत से विषय वस्तु की रचना करता है| और बहुत से विषय वस्तु ऐसे भी है जो इन्सान के अस्तित्व से भी पहले की है| उन रचनाओं के विचार ही उनका रहस्य बन जाता है| जो ये सोचने पर मजबूर करता ह

Reality of exam and result(परीक्षा और परिणाम की वास्तविकता)By Neeraj kumar

  परीक्षा और परिणाम की वास्तविकता वास्तविकता इन्सान के जीवन का हर एक दिन परीक्षा से भरा होता है | उस परीक्षा के परिणाम का भी फल इन्सान को मिलता है| परीक्षा को इन्सान बहुत से कार्यो में देख सकता है | परीक्षा जीवन की वो सच्चाई है जिसमे से निकल कर इन्सान अपने व्यक्तित्व की पहचान बनाता है वो अपने व्यक्तित्व से समाज में अपने प्रदर्शन से उन परीक्षाओ को पूरी करता है जिसमे कई तरह की चुनौतिया होती है उन चुनौतियों को पार करके इन्सान को अपनी परीक्षा का   परिणाम मिलता है| जब इन्सान को किसी परीक्षा में परिणाम मिलता है तो उसमे परिणाम को लेकर उत्साह दिखाई देता है और वो उत्साह ही इन्सान की कामियाबी का रास्ता तय करता है की उसकी परीक्षा किस तरह की थी| इन्सान जीवन में किस तरह की परीक्षा का सामना कर रहा है ये बहुत महत्व रखता है| इन्सान के हर किरदार के साथ उसकी परीक्षा भी बदलती रहती है| किस किरदार में किस तरह की परीक्षा की चुनौतियों का सामना किया, ये भी बहुत महत्व रखता है|     परीक्षा और परिणाम का विचार हर कार्य क्षेत्र में इंसान को एक के बाद एक परीक्षा मिलती रहती है| कुछ परीक्षा साधारण होती

Reality of simplicity and beauty(सादगी और सुन्दरता की वास्तविकता) By Neeraj kumar

  सादगी और सुन्दरता की वास्तविकता वास्तविकता सुन्दरता ईश्वर के द्वारा दिया गया रंगरूप है| जिसको पाकर इन्सान लाखो में पहचाना जा सकता है तो सादगी भी वो स्वभाव होता है जिसको कोई कोई इन्सान अपने जीवन में बना के रखता है कहते है सुन्दरता भी हमेशा सादगी में ही दिखती है| सुन्दरता का आकर्षण इंसानों को अपनी और खिचता है और मनमोहक कर देता है सुन्दरता की बात करे तो ईश्वर बहुत से जीव जन्तुओ में भी सुन्दरता देता है, जिसको देखकर इन्सान मनमोहक और मनभावन होता है। इंसानी सुन्दरता की बात करे तो सबसे पहले रंगरूप की बात होती है। रंगरूप वो रूप रेखा है जिसको देख सामने वाले उसकी रूप के आकर्षण में इस तरह खो जाते है, जैसे उन पर कोई जादू कर दिया गया हो| वही सादगी की बात करे तो सादगी का आकर्षण भी इंसानों को अपनी और आकर्षित करता रहता है। कई इन्सान सादगी में भी सुन्दरता को बखूबी पहचान लेते है| सादगी और सुन्दरता का विचार कहते है सुन्दरता का कोई अंत नहीं है, किसी एक सुंदर इन्सान या वस्तुओ की बात या खोज की जाये तो अनेको सुंदर एक के बाद एक मिलते रहते है यदि किसी एक सुंदर इन्सान की बात चलती है तो उसके साथ साथ द

Reality of wife and girlfriend(पत्नी और प्रेमिका की वास्तविकता)By Neeraj kumar

  पत्नी और प्रेमिका की वास्तविकता पत्नी वो है जो जीवन भर अपने वचनों को निभाते हुए, अपने पति के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में और पत्नी धर्म को पूरा करते हुए| जीवन बिता देती है। तो प्रेमिका वो है| जिसपर कोई जिम्मेदारी नहीं होती| प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ वो प्रेम के रिश्तो को निभाते हुए| अपने जीवन में प्रेम के बंधन में बंधी होती है| पत्नी समाज के रीती रिवाजो को निभाते हुए| विवाह कर अपने पति के साथ घर परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए| कई चीजो का त्याग करते हुए पत्नी बन कहलाती है| जबकि प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ समाज के रीती रिवाजो को दूर रखते हुए| एक पुरुष के साथ बिना जिम्मेदारियों के प्रेमिका बनना पसंद करती है| पत्नी और प्रेमिका दोनों के जीवन में बड़ा अंतर होता है| पत्नी को पति के सम्मान व् परिवार की मरियादाओ के साथ बंधा रहना पढता है जबकि एक प्रेमिका को प्रेमी के सम्मान और परिवार की म्रियादाओ के साथ बंधे रहने की जरुरत नहीं पढ़ती| पत्नी और प्रेमिका का विचार कभी प्रेमिका भी पत्नी बन जाती है तो कभी पत्नी भी प्रेमिका बन जाती है| पत्नी और प्रेमिका दोनों को समाज अलग

Reality of Mother and woman(माँ और महिला की वास्तविकता)By Neeraj kumar

  माँ और महिला की वास्तविकता ये बात सच है की माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती| और ये बात भी सच है की एक माँ का धर्म और कर्म एक महिला ही निभाती है| यदि इन्सान को ईश्वर के दर्शन करने है तो उसको अपनी माँ की तरफ देखना चाहिए| उसको ईश्वर के दर्शन हो जायेंगे| क्योकि धरती पर यदि भगवान है तो वो माँ के रूप में ही है| जो हर घर में मौजूद है| वो महिला ही माँ होती है जो एक माँ बनने पर अपने जीवन को दाव पर लगा देती है| दुनिया की कोई भी महिला जब माँ बनती है तो उसको सबसे ज्यादा ख़ुशी अपने माँ बनने पर ही होती है|   ईश्वर ने सिर्फ महिला को ही माँ बनाने के लिए चुना क्योकि महिला ही उस दर्द और पीड़ा को सहन कर सकती है| जो कोई पुरुष नहीं कर सकता| एक महिला जब माँ के रूप में आती है| तो वो अपने रंग रूप और अपने सौन्दर्य का त्याग करती है जो रंग रूप और सौन्दर्य ईश्वर ने उस महिला को दिया होता है| एक महिला ही माँ शब्द को सही तरीके से परिभाषित करती है| माँ की ममता परिवार में सबसे अलग देखने को मिलती है| माँ हजारो मुसीबते सहन करके भी अपने बच्चो को महसूस नहीं होने देती| दुनिया में करोड़ो माँ है जो जीवन के अनेको रिश्तों