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Reality of childhood and old age(बचपन और बुढ़ापे की वास्तविकता) By Neeraj kumar

 

बचपन और बुढ़ापे की वास्तविकता

वास्तविकता  

इन्सान के जीवन में बचपन का ही एक ऐसा समय होता है जो हर गम दुःख मुसीबत और चुनौतियों से बेखबर होता है हर वो इन्सान जो बुढापे में पहुँच चूका हो| जिसने अपने जीवन को अच्छे या बुरे दौर से बिता रहा हो| वो अपने बचपन को हमेशा याद करता है| बचपन की यादें हर इन्सान के जीवन की यादगार पल होते है और वो कभी भी अपने बचपन के बिताये गए पलो को याद करके कभी ख़ुशी महसूस कर लेता है तो कभी दुःख महसूस कर लेता है बचपन से बुढ़ापे तक पहुचने के लिए इन्सान को एक उम्र की समय सीमा बितानी पढ़ती है, उसके बाद ही उस इन्सान के बचपन से बुढ़ापे के सफर तक पहुच पाता है| बचपन चुस्ती-फुर्ती खेल कूद और उत्साह से भरा होता है तो बुढ़ापा जिम्मेदारियों और कमजोरियों से घिरा जीवन होता है|

बचपन और बुढ़ापे का विचार

इन्सान जो अपने बचपन में सीखता है वो उसके बुढ़ापे तक काम आता है चाहे वो सीखे गए संस्कार हो या सीखे गए व्यवहार हो| बचपन में सीखी गई आदते अच्छी हो या बुरी वो आदते बुढ़ापे तक बनी रहती है| कभी कभी इन्सान बचपन की आदतों को छोड देता है| तो कभी बचपन की आदते बुढ़ापे तक नहीं रहती| जीवन में बचपन का दौर सीखने और खेलकूद में ज्यादा बिताया जाता है| बचपन में जिम्मेदारियों का भी बोझ नहीं होता| जबकि बुढ़ापे में इन्सान अपने जीवन की अधिकतर जिम्मेदारियों को निभाने की कोशिश करता रहता है| बचपन और बुढ़ापे के दौर में हमेशा इन्सान को किसी ना किसी की जरुरत होती ही है क्योकि जीवन के बचपन में बच्चे को उसके माता पिता या परिवार का सहारा चाहिए होता है तो बुढ़ापे की अवस्था में बीमारियों और उम्र को लेकर उसके बच्चो का सहारा चाहिए होता है|  

 

बचपन और बुढ़ापे का महत्व

हर इन्सान के जीवन में उसके बचपन का एक महत्व होता है, बचपन में शिक्षा और जीवन के तौर तरीके सीखने को मिलते रहते है| जो उस इन्सान के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है| वही बुढ़ापे में इन्सान के पास उसके बिताये गए बचपन का अनुभव कर्मो और उम्र का लेखा जोखा होता है| उसके पास अनुभव का एक पिटारा होता है| जो उसके परिवार, उसके समाज और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

 

बचपन की यादो को इन्सान अपनी तस्वीरों और खेल कूद के माध्यम से याद कर सकता है जबकि बुढ़ापे को कभी याद नहीं किया जा सकता| बुढ़ापे को हमेशा जिया जा सकता है| इन्सान अपने जीवन के उस दौर में होता है जिसके बाद कभी भी उस बीते हुए कल को नहीं ला सकता| उसके जीवन के अंतिम दौर का सफर शुरू हो चूका होता है|

 

बचपन की एक समय सीमा होती है लेकिन बुढ़ापे की कोई समय सीमा नहीं होती| जब तक इन्सान की मृत्यु नहीं हो जाती उसका बुढ़ापा युही उस इन्सान के साथ चलता रहता है| वो इन्सान कितना ही असहाय क्यों ना हो जाये जब तक मृत्यु से उसका मिलन नहीं होता वो अपने बुढ़ापे में ही जीता रहता है| बुढ़ापे की स्थिति एक ऐसी स्थिति है| जिसमे इन्सान के बिताये गए समय की यादें ही यादें होती है| इन्सान अपने बचपन और जवानी को अच्छे से याद कर सकता है|

 

निष्कर्ष

बचपन का दौर एक ऐसा दौर होता है, जिससे इन्सान कभी नहीं निकलना चाहता और बुढ़ापे का दौर एक ऐसा दौर होता है| जिसमे इन्सान कभी नहीं जाना चाहता| बचपन गलतियों से भरा होता है तो बुढ़ापा गलतियों से सिखा गया सबक होता है, बचपन जागता हुआ सवेरा होता है तो बुढ़ापा ढलती हुई शाम होती है|


Reality of childhood and old age

The reality

In the life of a human being, there is a time of childhood which is unaware of every sorrow, trouble and challenges, every person who has reached old age. One who has been spending his life in good or bad times. He always remembers his childhood. Memories of childhood are memorable moments in the life of every human being and whenever he feels happy by remembering his childhood spent, sometimes he feels sad and sometimes he feels an age to reach from childhood to old age. The time limit is spent studying, only then the person can reach the journey from childhood to old age. Childhood is full of agility and excitement, then old age is a life surrounded by responsibilities and weaknesses.

Thoughts of childhood and old age

The person who learns in his childhood is useful till his old age, whether it is learned rites or learned practices. The patterns learned in childhood, whether good or bad, they persist till old age. Sometimes a person abandons childhood habits. So sometimes childhood habits do not last till old age. The phase of childhood in life is spent more in learning and sports. There is no burden of responsibilities in childhood. Whereas in old age man keeps trying to fulfill most of the responsibilities of his life. In the age of childhood and old age, a person always needs someone because his child needs support from his parents or family in his childhood, then in the old age, his children need support for diseases and age. Is

 

Importance of childhood and old age

There is an importance of his childhood in the life of every human being, in childhood, education and ways of life are being found. Which is most important for that person. In his old age, the experience of childhood spent with a person is an account of deeds and age. He has a box of experience. Which plays an important role for his family, his society and the world.

A person can remember memories of childhood through his pictures and sports, while old age can never be remembered. Old age can always be lived. A person is in that phase of his life, after which he can never bring that past yesterday. The journey of the last phase of his life has begun.

 

There is a time limit for childhood but there is no time limit for old age. Until the death of man, his old age goes on with that person. No matter how helpless that person is, he does not live until death, he lives in his old age. The condition of old age is one such condition. In which the memories of the time spent by human beings are memories. A person can remember his childhood and youth very well.

 

The conclusion

The phase of childhood is such a phase, which man never wants to get out of, and the phase of old age is such a phase. In which man never wants to go. Childhood is full of mistakes, old age is a lesson taught by mistakes, childhood is a dawn, and old age is a dusk.

 

    

 

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