Skip to main content

Reality of wife and girlfriend(पत्नी और प्रेमिका की वास्तविकता)By Neeraj kumar

 

पत्नी और प्रेमिका की वास्तविकता

पत्नी वो है जो जीवन भर अपने वचनों को निभाते हुए, अपने पति के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में और पत्नी धर्म को पूरा करते हुए| जीवन बिता देती है। तो प्रेमिका वो है| जिसपर कोई जिम्मेदारी नहीं होती| प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ वो प्रेम के रिश्तो को निभाते हुए| अपने जीवन में प्रेम के बंधन में बंधी होती है| पत्नी समाज के रीती रिवाजो को निभाते हुए| विवाह कर अपने पति के साथ घर परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए| कई चीजो का त्याग करते हुए पत्नी बन कहलाती है| जबकि प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ समाज के रीती रिवाजो को दूर रखते हुए| एक पुरुष के साथ बिना जिम्मेदारियों के प्रेमिका बनना पसंद करती है| पत्नी और प्रेमिका दोनों के जीवन में बड़ा अंतर होता है| पत्नी को पति के सम्मान व् परिवार की मरियादाओ के साथ बंधा रहना पढता है जबकि एक प्रेमिका को प्रेमी के सम्मान और परिवार की म्रियादाओ के साथ बंधे रहने की जरुरत नहीं पढ़ती|

पत्नी और प्रेमिका का विचार

कभी प्रेमिका भी पत्नी बन जाती है तो कभी पत्नी भी प्रेमिका बन जाती है| पत्नी और प्रेमिका दोनों को समाज अलग अलग नजरिये से देखता है| पत्नी और प्रेमिका दोनों के पीछे एक स्त्री होती है| जो किसी की पत्नी बनना पसंद करती है तो किसी की प्रेमिका बनना पसंद करती है| पत्नी पहले प्रेमिका भी हो सकती है तो प्रेमिका पहले पत्नी भी हो सकती है| समाज का नजरिया किसी स्त्री बनी पत्नी को उस नजरिये से देखता है जिस समाज का विस्तार समाज में रहने वाले इंसानों ने किया होता है| जबकि समाज का नजरिया किसी स्त्री बनी प्रेमिका को उस नजरिये से देखता है जिस समाज का विस्तार समाज में रहने वाले इंसानों ने नहीं किया होता| प्रेमिका के प्रति समाज में रहने वाले इंसानों की भाषा अलग अलग विचरो को दर्शाती है| जबकि पत्नी के लिए समाज में रहने वाले इंसानों की भाषा अलग तरह के विचारो को दर्शाती है| दुनिया में इंसानों ने अपने अपने समाज को इस तरह से बनाया है की कोई स्त्री प्रेमिका बनकर खुश रहती है| तो कोई स्त्री पत्नी बनकर खुश रहती है|

पत्नी और प्रेमिका का महत्व

पत्नी का महत्व समझे तो किसी स्त्री को पत्नी का नाम तभी मिलता है जब वो समाज में किसी पुरुष के साथ अपने परिवार को बनाने के लिए पत्नी सम्बन्ध का निर्माण करती है| एक स्त्री पत्नी के नाम के लिए सामाजिक व् धार्मिक मान्यताओ के आधार पर विवाह करते हुए| पत्नी नाम की संज्ञा को प्राप्त करती है| जो विवाह के द्वारा ही सम्भव मानी जाती है|

 

किसी स्त्री के लिए पत्नी सम्बन्ध को निभाना उतना ही कठिन होता है जितना किसी स्त्री के लिए प्रेमिका के सम्बन्ध को निभाना नहीं होता| जबकि प्रेमिका सिर्फ अपने प्रेमी के प्रति ही किसी कार्य या किसी वचन के बंधन में बंधी होती है| लेकिन पत्नी अपने पति के साथ उस परिवार और अपने बच्चो के प्रति कई तरह के कार्यो या वचनों के बंधन में बंधी होती है|

 

प्रेमिका की बात करे तो किसी स्त्री को प्रेमिका बनने के लिए पत्नी बनने की कोई जरुरत  नहीं होती| कोई स्त्री किसी भी पुरुष की प्रेमिका बन सकती है| उस स्त्री को कोई सामाजिक व् धार्मिक मान्यताओ के आधार पर विवाह करने की जरुरत नहीं होती| समाज किसी स्त्री को किसी पुरुष की प्रेमिका की संज्ञा तभी देता है जब वो जान सके की स्त्री और पुरुष के बीच में एक ऐसा सम्बन्ध है| जो उस स्त्री को एक प्रेमिका की संज्ञा का नाम देता है|

 

एक पत्नी अपने पति के नाम के साथ जुड़ने पर वो रीती रिवाजो को पूरा करती है जो एक प्रेमिका अपने प्रेमी के नाम के साथ जुड़ने पर नहीं करती| स्त्री अपने लिए पत्नी नाम का महत्व ज्यादा रखती है| जबकि स्त्री अपने लिए प्रेमिका के नाम को महत्व नहीं देती| पत्नी अपने पति के घर की वो स्त्री मानी जाती है| जिसको घर और समाज वो इज्जत और सम्मान देता है| जो स्त्री बनी पत्नी को मिलना चाहिए| जबकि प्रेमिका को प्रेमी के घर की वो स्त्री मानी जाती है जिसको घर और समाज वो इज्जत और सम्मान नहीं देता| जो स्त्री बनी प्रेमिका पाना चाहती है|

निष्कर्ष

कोई भी स्त्री पत्नी के नाम को महत्व देती है तो कोई स्त्री प्रेमिका के नाम को महत्व देती है



Reality of wife and girlfriend

The wife is the one who carries her words throughout her life. Accomplishing family responsibilities with her husband and wife fulfilling religion. If she spends her life, she is the girlfriend. Which has no responsibility. Girlfriend playing that love affair with her lover. It is tied in the bond of love in your life. Wife playing the rituals of the society. Seeing the responsibilities of the family at home with her husband. Renouncing many things, she is called a wife. While the girlfriend along with her lover kept away the customs of the society. Likes to be a girlfriend with a man without responsibilities. There is a big difference in the life of both wife and girlfriend. The wife has to read the honor of the husband and being tied to the family Mariyadao while a girlfriend does not have to read the honor of the lover and the need to be tied with the family mariyadao.

Wife and girlfriend idea

Sometimes a girlfriend also becomes a wife, sometimes a wife also becomes a girlfriend. The society views both wife and girlfriend from different perspectives. There is a woman behind both wife and girlfriend. Who likes to be someone's wife, then likes to be someone's girlfriend. Wife can also be the first girlfriend, then the girlfriend can also be the first wife. The view of society looks at the wife of a woman from the perspective of which the human beings living in the society have expanded. Whereas the view of society looks at a woman's girlfriend in a way that society would not have expanded by humans living in the society. The language of human beings living in society towards girlfriend represents different views. Whereas for the wife, the language of human beings living in the society reflects different views. Human beings have created their own society in the world in such a way that a woman is happy by becoming a girlfriend. So a woman is happy as a wife.

 

Importance of wife and girlfriend

Understanding the importance of the wife, a woman gets the name of the wife when she builds a wife relationship with a man in the society to form her family. Getting married on the basis of social and religious beliefs for the name of a female wife. The wife gets the noun name. Which is considered possible only through marriage.

 

It is as difficult for a woman to maintain a wife relationship as it is not for a woman to maintain the relationship of a girlfriend. Whereas the girlfriend is tied to her lover only in relation to an act or a promise. But the wife is tied with her husband in the bond of many acts or words towards that family and her children.

 

Talking about a girlfriend, there is no need for a woman to become a wife to become a girlfriend. A woman can become the girlfriend of any man. That woman does not need to get married on the basis of any social or religious beliefs. Society calls a woman the girlfriend of a man only when she knows that there is such a relationship between a woman and a man. Who gives the woman the name of a girlfriend's noun.

 

When a wife associates with her husband's name, she completes the ritual which a girlfriend does not when joining her lover's name. A woman takes more importance of the wife's name for herself. While the woman does not attach importance to the name of the girlfriend for herself. The wife is considered to be that woman of her husband's house. Whom the house and society respect and respect. The woman who becomes a wife should get it. Whereas the girlfriend is considered to be the woman of the lover's house, whose house and society does not respect and respect her. The woman who wants to have a girlfriend.

The conclusion

If any woman gives importance to the name of the wife, then any woman gives importance to the name of the girlfriend.

 

 

 

Comments

Popular posts from this blog

Reality of Religion (धर्म की वास्तविकता ) by Neeraj kumar

                                    Reality of Religion Reality Religion is very important in our life. The reality of religion teaches us that a person can walk on the path of religion, if he wants, he can become a religious guru. We have to study from birth to death while following religion. Religion can also give us mental and spiritual peace if it follows the right path of religion . The real knowledge of religion can be obtained from the culture of that person, the rites which have affected that person. There are different places in the world to walk on the path of religions, which tells us that if we want to receive God's grace, then we have to walk the path of religion. We cannot get any blessing from God without becoming religious. Thought of  Religion Ever since humans started taking the name of God in the world, religion has arisen and humans want to get God's blessings through their own religion. There are different religions in the world, the ways of those religio

Reality of Rites and culture(संस्कार और संस्कृति की वास्तविकता) By Neeraj Kumar

  संस्कार और संस्कृति की वास्तविकता वास्तविकता   संस्कार ऐसे होने चाहिए जिससे इन्सान की संस्कृति की पहचान होती हो | संस्कार एक ऐसी रूप रेखा जिससे इन्सान की संस्कृति झलकती है की वो किस संस्कृति से जुडा इन्सान है संस्कार ही इन्सान के व्यक्तित्व को निर्धारित करते है जो सामने वाले  पर कितने प्रभाव डालते है जब भी संस्कारो की बात आती है तो सबसे पहले उन इन्सानो की संस्कृति को देखा जाता है की वो किस संस्कृति से जुड़ा है संस्कार और संस्कृति से जुड़े उन इंसानों को आसानी से पहचान सकते है जिन्होंने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई समाज कल्याण मार्गो पर चलने का रास्ता दुनिया को दिखाया| जिससे उनकी संस्कृति की एक पहचान बनी| इन्सान की पहचान में एक बड़ी भूमिका उसके संस्कारो की होती है जो उसकी संस्कृति को दर्शाती है|दुनिया में पहनावे से भी इंसानो की संस्कृति की पहचान असानी से हो जाती है। संस्कार और संस्कृति का विचार कहते है संस्कार वो धन है जो कमाया नहीं जाता ये इन्सान को उसके परिवार उसके समाज   से विरासत में ही मिलता है जिस परिवार में वो इन्सान जन्म लेता है उस इन्सान की परवरिश और उसके संस्कार

Reality of Love(प्यार की वास्तविकता) By Neeraj Kumar

                                                      प्यार की वास्तविकता, वास्तविकता   प्यार एक ऐसा एहसास है जिसको समझने के लिए हमें प्यार के रास्ते पर चलना होगा| प्यार ही इन्सान के जीवन की यात्रा होनी चाहिए बिना प्यार के जीवन का कोई आधार नहीं है हम किस तरह अपने प्यार के एहसास को महसूस कर सकते है हमें ये उन इंसानों से सीखना होगा जो प्यार को किसी के लिए महसूस करते है|  प्यार का एहसास कब और क्यों होता है? प्यार उसको कहते है, जब कोई इन्सान दुसरे के लिए वो एहसास को महसूस करने लगे की वो भी उसको बिना देखे या बात करे नहीं रह सकता तो हम उसको प्यार कह सकते है| प्यार के एहसास , को जानने और समझने के लिए हमें प्यार के बारे में विस्तार से पढना होगा ताकि जब हमें किसी से प्यार हो या किसी को हम से प्यार हो तो हम उस एहसास को महसूस करके समझ सके|   प्यार  के   एहसास पर विचार    प्यार दो दिलो का सम्बन्ध है, जो किसी को भी किसी से हो सकता है| जब कोई इन्सान किसी दुसरे के लिए हर उस बात को मानने लगे और उस एहसास में उसका कोई लालच ना छुपा हो और वो उसको अपने कार्यो में मददगार पाए और हम इस बात को अच्छे से जान प