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Reality of performance and feedback( प्रदर्शन और प्रतिक्रिया की वास्तविकता) By Neeraj kumar

 प्रदर्शन और प्रतिक्रिया की वास्तविकता

प्रदर्शन एक ऐसी क्रिया है जिसको करके इन्सान किसी दुसरे की प्रतिकिर्या प्राप्त करता है| प्रदर्शन अकेले भी होता है और प्रदर्शन कई दूसरे इंसानो के साथ भी होता है। दुनिया में कोई ना कोई इन्सान किसी ना किसी विषय वस्तु को लेकर अपने प्रदर्शन को दिखा रहा है| प्रदर्शन शब्द को कई तरह की प्रतिक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है| इन्सान जब कोई ऐसा कार्य करता है जिसमे उसको दुसरे इंसानों की प्रतिक्रिया मिलती है| इन्सान के जीवन में हर एक समय उसके प्रदर्शन की वास्तविकता को दिखा रहा है| वही प्रतिक्रिया वो शब्द होते है जिसके लिए इन्सान को दुसरो के द्वारा ही पता चलता है की उसके कार्य का प्रदर्शन कितना प्रभावित था या नहीं| इन्सान के बहुत से कार्य ऐसे होते है जिसको कई तरह की प्रतिक्रिया मिलती रहती है|

प्रदर्शन और प्रतिक्रिया का विचार

प्रतिक्रिया का विचार इन्सान के मन में प्रदर्शन को देखकर ही आता है| इन्सान प्रतिक्रिया के शब्दों के लिए किसी भी तरह के विचार रख सकता है| हर इन्सान के अलग अलग विचार है और वो किसी  प्रदर्शन के लिए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकता है| कभी इन्सान की प्रतिक्रिया अच्छे प्रदर्शनों के लिए होती है तो कभी इन्सान की प्रतिक्रिया बुरे प्रदर्शनों के लिए होती है| बिना प्रतिक्रिया के किसी भी प्रदर्शन की वास्तविकता का पता नहीं लगाया जा सकता| प्रतिक्रिया से ही प्रदर्शन की पूरी रूप रेखा सामने आती है| प्रतिक्रिया ही प्रदर्शन में गलतियों में सुधार को करवाती है| प्रदर्शन से इन्सान अपने विचारो को दुनिया के सामने ला सकता है| प्रदर्शन से इन्सान अपने उन गुणों को दुनिया के सामने ला सकता है जिससे उसको दुसरो की प्रतिक्रिया से एक पहचान मिलती हो|

प्रदर्शन और प्रतिक्रिया का महत्व

प्रदर्शन के महत्व को समझने के लिए इन्सान को स्वयं किसी ना किसी कार्य को लेकर प्रदर्शन करना होगा, तभी वो इन्सान प्रदर्शन के महत्व को समझ सकेगा| जब भी कोई इन्सान किसी के सामने अपना प्रदर्शन करता है तो स्वभाविक रूप से उसको एक ऐसी प्रतिक्रिया की जरूरत होती है जो उसके प्रदर्शन को समाज या दुनिया के सामने एक पहचान दिला सके| दुनिया में बहुत से ऐसे भी इन्सान है जो किसी ना किसी तरह अपना प्रदर्शन दुनिया के सामने कर रहे है तब भी उनके लिए कोई ना कोई प्रतिक्रिया जरुर निकलती है वो प्रतिक्रिया अच्छी हो या बुरी हो|


प्रतिक्रिया भी ऐसे शब्द होते है जिससे प्रदर्शन करने वाले को कभी प्रशंसा मिल जाती है तो कभी निंदा मिल जाती है प्रतिक्रिया में इन्सान वही देखता है जो प्रदर्शन करते समय दिखता  है| प्रतिक्रिया प्रदर्शन का आईना होता है| जैसे प्रदर्शन होगा उसी तरह की प्रतिक्रिया भी होगी| दुनिया में जब भी कोई इन्सान किसी दुसरे के लिए अपनी प्रतिक्रिया देता है तो पहले उसके प्रदर्शन की पूरी रूप रेखा को समझ लेता है तभी वो उन शब्दों का प्रयोग करता है जो प्रदर्शन के लिए प्रतिक्रिया हो|

 

इन्सान अपने दैनिक जीवन में बहुत से ऐसे कार्य करता है जो एक प्रतिक्रिया को लेकर किया जाता है| इन्सान को अपने हर उस कार्य को प्रदर्शन के माध्यम से दुनिया के सामने लाना चाहिए| जिससे उसको एक ऐसी प्रतिक्रिया मिले जिसमे प्रदर्शन के मूल तथ्य छुपे हो| यही इन्सान के प्रदर्शन करने का महत्व होना होता है|

निष्कर्ष

प्रदर्शन और प्रतिक्रिया का महत्व यह है की जहाँ प्रदर्शन होगा वहां प्रतिक्रिया भी होगी| इसलिए इन्सान को कभी भी किसी की प्रतिक्रिया से घबराना नहीं चाहिए| प्रतिक्रिया अच्छी भी मिल सकती है और प्रतिक्रिया बुरी भी मिल सकती है| 



Reality of performance and feedback

Demonstration is an action by which a person receives a response from another. The performance is also done alone and the performance is also with many other humans.Some person in the world is showing his performance by taking some or the other subject matter. The word display has to go through a variety of reactions. When a person does an act in which he gets the response of other humans. Every time in a person's life, he is showing the reality of his performance. The same reaction is the words for which the person only knows through the others how much his work performance was affected or not. Many human actions are such that they get many types of reactions.

Thought of ​​performance and feedback

The idea of ​​reaction comes in the mind of the person only by looking at the performance. The person can have any kind of ideas for the words of the reaction. Every person has different views and can express their reaction to a demonstration. Sometimes a human's reaction is for good performances, sometimes a human's reaction is for bad performances. The reality of any performance cannot be ascertained without feedback. The entire form of the performance is revealed by the reaction itself. Feedback only leads to correction of mistakes in performance. A person can bring his thoughts to the world by performing. By performance, a person can bring those qualities to the world so that he gets an identity from the reaction of others.

Importance of performance and feedback

To understand the importance of performance, a person has to perform some task on his own, only then he will be able to understand the importance of performance. Whenever a person performs his performance in front of someone, naturally he needs a response that can give his performance an identity in front of the society or the world. There are many such people in the world who are performing in front of the world in some way or the other, yet there is a reaction for them, whether the response is good or bad.


Reactions are also words whereby the performer sometimes gets praise, sometimes gets condemnation. In response, the person sees what is seen while performing. Feedback is a mirror of performance. There will also be a similar reaction as the demonstration takes place. Whenever a person in the world gives his response to another, he first understands the entire outline of his performance, only then he uses the words which are the reaction to the performance.

 

A person performs many such tasks in his daily life which are done with a reaction. Man should bring all his work to the world through performance. Which will give him a response in which the performance facts are hidden. This is the importance of performing human beings.

The conclusion

The importance of performance and feedback is that where there will be performance, there will also be feedback. Therefore, the person should never be afraid of anyone's reaction. Feedback can also be found good and reaction may be found bad.


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