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Reality of Encouragement and competition( प्रोत्साहन और प्रतियोगिता की वास्तविकता) By Neeraj Kumar

 प्रोत्साहन और प्रतियोगिता की वास्तविकता

प्रतियोगिता वो है जिसको पार करके इन्सान अपने जीवन में वो मुकाम हासिल करता है जिसके लिए उसको प्रोत्साहित किया गया| प्रतियोगिता एक ऐसा रास्ता है जिसको आज के समय में हर इन्सान को पार करना ही होता है| जो इन्सान अपनी चुनी गई प्रतियोगिता से हार मान लेता है, वो कभी भी अपने चुने गए लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर पाता| देखा जाए तो आज हर क्षेत्र प्रतियोगिता से भरा पड़ा है| इन्सान के जीवन का हर दिन प्रतियोगिता से होकर ही गुजरता है| जिसमे कभी उसको किसी का प्रोत्साहन मिल जाता है तो कभी उसको कोई प्रोत्साहित करने वाला नहीं मिलता प्रोत्साहित भी एक ऐसा कार्य है जो इन्सान में उसके लक्ष्य के लिए मनोबल को इतना बड़ा देता है की इन्सान अपनी प्रतियोगिता के लिए वो उत्साह महसूस करने लगता है जो उसको किसी के द्वारा प्रोत्साहित करने पर हुआ|

प्रोत्साहन और प्रतियोगिता का विचार

प्रतियोगिता का विचार करे तो इन्सान के जन्म से ही उसकी प्रतियोगिता शुरू हो जाती है| और मृत्यु तक उसके साथ प्रतियोगिता चलती रहती है| वर्तमान में तो प्रतियोगिता को पार करना इन्सान के जीवन का दैनिक कार्य बन गया है| प्रतियोगिता का विचार इन्सान के मन में तब पनपने लगता है| किसी दुसरे इन्सान से आगे निकलना हो| जब उसको अपने किसी साथी या अपने जीवन के उस लक्ष्य को हासिल करना हो जो उसके मन में प्रतियोगिता का विचार लाता है| प्रतियोगिता में भी तभी जीत मिलती है जिसमे उसका साथी प्रोत्साहन शामिल हो| प्रोत्साहन किसी के द्वारा भी किया जा सकता है| प्रोत्साहन से प्रतियोगिता में मिलने वाली चुनौती आसान लगने लगती है| प्रोत्साहन से इन्सान का अपनी प्रतियोगिता के लिए मनोबल बड़ा चढ़ा रहता है प्रोत्साहन से प्रतियोगिता में आने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सकता है| प्रोत्साहन से प्रतियोगिता का वो रूप आसान लगने लगता है जिसको पहले इन्सान मुश्किल समझ रहा था|

प्रोत्साहन और प्रतियोगिता का महत्व

प्रतियोगिता के महत्व को समझे तो इन्सान आज उस युग में पहुच चूका है जिसमे प्रतियोगिता के बिना कुछ हासिल नहीं होता| प्रतियोगिता इन्सान को जीवन की उस सच्चाई से सामना करवाती है जिसके बिना जीवन का कोई लक्ष्य हासिल नहीं होता| प्रतियोगिता हर उस इन्सान के लिए महत्व रखती है जो अपने जीवन में कुछ प्राप्त करना चाहते हो| प्रतियोगिता उस इन्सान से हमेशा खुश रहती है| जो प्रतियोगिता के महत्व को समझते हुए उसको जीतने की कोशिश करते रहते है| प्रतियोगिता का जीवन से आज वो रिश्ता हो चूका है, जो हर कदम पर काम आता है| प्रतियोगिता से यदि कोई इन्सान दिल चुराता है या भागता है तो प्रतियोगिता उसके लिए कठिन बन जाती है| प्रतियोगिता को जीतने के लिए जिस प्रोत्साहन की जरुरत होती है| वो हमेशा प्रतियोगिता में जीत हासिल करवाता है|

 

प्रोत्साहन करना इन्सान की उस ताकत को जगाना होता है जो इन्सान के हौसलों में बरकरार रहती है| प्रोत्साहन हमेशा प्रतियोगिता की चुनौतियों से आगे लेकर जाता है प्रोत्साहन से इन्सान को बल और बुद्धि में जो शक्ति बैठी होती है, उसे जगाने में काम आती है| प्रोत्साहन कभी कभी इन्सान का मनोबल इतना बड़ा देता है| जिससे उसको प्रतियोगिता जीतने में आसानी हो जाती है| प्रोत्साहन के द्वारा इन्सान ने बहुत सी प्रतियोगिता को जीता है| जो इन्सान को वो पद प्रतिष्ठा को दिलवा देता है| जो इन्सान सपने में भी नहीं सोच सकता प्रोत्साहन हमेशा अच्छे विचारो और अच्छे विवादों का होना चाहिए| प्रोत्साहन कभी कभी इन्सान को वो सब भी करवा देता है, जो इन्सान कभी नहीं करना चाहता होता|

 

दुसरे शब्दों में प्रतियोगिता को जीवन की उस वास्तविकता से समझ सकते है जो एक चुनौती को इन्सान के सामने लाकर खड़ा कर देते है| वैसे भी जो इन्सान अपने जीवन की वास्तविकता को प्रतियोगिता की नजर से देखते है| वो कभी भी प्रतियोगिता से घबराते नहीं है वो प्रतियोगिता की चुनौती को हमेशा आसानी से पार कर लेते है| अच्छे कार्यो के लिए किया गया प्रोत्साहन हमेशा अच्छे परिणाम को व्यक्त करता है और बुरे कार्यो के लिए किया गया प्रोत्साहन हमेशा बुरा परिणाम को व्यक्त करता है| इन्सान के जीवन में किसी ना किसी का प्रोत्साहन जरुर होना चाहिए, जो हमेशा जीवन की प्रतियोगिता से पार करवाता रहे|

निष्कर्ष

इन्सान के लिए प्रतियोगिता समाज की उस सच्चाई को व्यक्त करती है| जिसको इन्सान अपने जीवन के व्यक्तित्व में तलाशता रहता है और प्रतियोगिता से जीतने की कोशिश करता रहता है| वही प्रोत्साहन भी इन्सान के उस मनोबल को बाहर निकालने के लिए जरुरी हो जाता है, जिसको इन्सान कभी अपने जीवन में देख भी नहीं पाता|




Reality of Encouragement and competition

Competition is the one by which a person achieves the milestone in his life for which he was encouraged. Competition is such a path which in today's time has to cross every human being. A person who accepts a defeat from his chosen competition is never able to achieve his chosen goal. If seen, every field is filled with competition today. Every day of a person's life passes through competition. In which sometimes he gets someone's encouragement, sometimes he does not get any encouragement. Encouragement is also an act that gives so much morale to his goal in human being that the person starts to feel the enthusiasm for his competition which It happened when someone encouraged him.

Thougth of ​​ Encouragement and competition

If you consider the competition, the competition starts from the birth of a person. And the competition goes on till death. Presently, it has become a daily task of human life to overcome the competition. The idea of ​​competition starts to develop in the human mind. Have to get ahead of another person. When he has to achieve any of his companions or that goal of his life which brings the idea of ​​competition in his mind. The competition also wins only when its partner's encouragement is included. Encouragement can be done by anyone. Encouragement makes the challenge in the competition seem easy. With the encouragement, the morale of the person for his competition keeps on increasing, due to the encouragement, the difficulties faced in the competition can be reduced. Encouragement makes it easier to find the form of competition which was previously considered difficult by humans.

Importance of Encouragement and competition

If you understand the importance of competition, then the person has reached the era in which nothing is achieved without competition. The competition makes the person face the truth of life without which no goal of life is achieved. Competition is important for every person who wants to get something in their life. The competition is always happy with that person. Those who understand the importance of competition, try to win it. Today is the relation of the competition with life, which is useful at every step. If a person steals or runs away from the competition, the competition becomes tough for him. The incentive needed to win the competition. He always wins the competition.

 

Encouragement is to awaken the strength of human beings, which remains in the spirits of human beings. Encouragement always takes you ahead of the challenges of competition. Encouragement helps in awakening the power and intelligence of a person. Encouragement sometimes gives so much morale of a person. Which makes it easier for them to win the competition. Through encouragement, humans have won many competitions. The person who gets that position gets prestige. The person who cannot think even in dreams, encouragement should always be of good thoughts and good controversies. Encouragement sometimes makes a person do everything that a human would never want to do.

 

In other words, you can understand the competition from the reality of life, which brings a challenge before a person. Anyway, people who see the reality of their life from the point of view of competition. They are never afraid of competition, they always overcome the challenge of competition easily. Encouragement for good works always expresses good results and encouragement for bad actions always conveys bad results. There must be some encouragement in the life of a person, who should always overcome the competition of life.

The conclusion

The competition for humans expresses that truth of society. Whom the person keeps looking for in the personality of his life and tries to win from the competition. The same encouragement is also necessary to bring out the morale of the human being, which the person can never see in his life.


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