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Reality of mistake and misunderstanding(गलती और गलतफहमी की वास्तविकता) By Neeraj kumar

 

गलती और गलतफहमी की वास्तविकता

गलती और गलतफहमी दोनों शब्दों का सम्बन्ध एक दुसरे से पूरी तरह से अलग-अलग है| गलती किसी भी इन्सान से हो सकती है, लेकिन गलतफ़हमी किसी-किसी इन्सान को होती है| गलती एक ऐसी वास्तविकता है, जिसमे सुधार की आवश्यकता की जा सकती है और गलती को सुधारा जा सकता है| जबकि गलतफ़हमी एक विचार होता है जिसको ग्रहण कर इन्सान बड़ी-बड़ी गलती कर लेता है| गलतफहमी अक्सर इन्सान की सोच में इस तरह बस जाती है की उसको निकालना बहुत मुश्किल होता है, जब तक गलतफहमी की वास्तविकता पूरी तरह इन्सान के सामने नहीं आती और इन्सान अपनी ही बनाई गई गलतफहमी में इसी तरह फंसा रहता है| कभी गलतफहमी सही भी हो जाती है तो कभी गलतफहमी गलत भी हो जाती है| गलतफहमी कई तरह से इन्सान के दिमाग में रहती है| जिसको निकालना स्वयं उस इन्सान के हाथो में होता है, जिसको गलतफ़हमी हुई है| गलती वो होती है, जो कार्य को सही नहीं ठहराती और गलतफहमी वो होती है जो किसी कार्य के लिए अपनी सोच में सही या गलत के विचार टकराते रहते है|

गलती और गलतफहमी का विचार

अक्सर इन्सान के जीवन में उससे गलती होती रहती है| कुछ गलती ऐसी होती है जो सामान्य तौर पर कोई महत्व नहीं रखती| लेकिन कुछ गलती ऐसी भी होती है, जो असामान्य तौर से देखी जाती है| जिसका इन्सान के जीवन पर बहुत गहरा असर पढता है लेकिन  गलती एक ऐसा सबक है, जिसको करके ही इन्सान सबक लेता है| इन्सान किसी दुसरे की गलती से भी सबक ले सकता है| गलती ही कार्य को सही करने के लिए तैयार करती है| गलतफ़हमी इन्सान स्वयं अपनी कल्पनाओ में बना लेता है| और उस गलतफहमी में इन्सान इतना डूब जाता है की उससे बाहर निकलने का रास्ता ही उसको नहीं मिलता| गलती करना इन्सान के कार्य में देखा जाता है लेकिन गलतफहमी को इन्सान की सोच में सोचा जाने वाला एक विचार है| जो गलत साबित होने पर गलतफहमी शब्द के नाम से जाना जाता है|

गलती 

गलती वो कहलाती है जिसमे कार्य को सही नहीं पाया जाता| इन्सान अपने दैनिक जीवन में बहुत सारे ऐसे कार्य करता है जिसमे वो सही नहीं होता और वो ही इन्सान के लिए गलती बन जाती है, जो बिना सोचे समझे की गई हो| गलती किसी भी इन्सान से हो जाती है| दुनिया में ऐसा कोई इन्सान नहीं है, जो गलती नहीं करता हो| गलती करने पर उसको वो सबक मिलता है, जो उसके द्वारा की गई गलती पर ही स्वयं उसको मिला हो|

गलतफहमी

गलतफहमी इन्सान की सोच में एक ऐसा विचार है, जिसके उत्पन्न होने पर इन्सान गलतफहमी करने लगता है| गलतफहमी में कई बार इन्सान गलती भी कर जाता है|

इन्सान को गलतफहमी कई विषय वस्तुओ पर हो जाती है| गलतफहमी में इन्सान कई बार हिंसा को भी अपना लेता है| जिसका नुकसान उसको जीवनभर भी भुगतना पड़ सकता है|

गलती और गलतफहमी में अंतर

गलतफहमी का कोई अस्तित्व नहीं होता मगर उसके द्वारा की गई गलती का अस्तित्व होता है, जिसका उस इन्सान पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है| गलती, वास्तविकता की रुपरेखा को प्रदर्शित करती है| जबकि गलतफहमी की कोई वास्तविकता नहीं होती है| गलती स्वयं या किसी दुसरे के द्वारा भी महसूस की जा सकती है| जबकि गलतफहमी स्वयं या दुसरे के द्वारा उत्पन्न विचार से ही होती है| गलती में सुधार किया जा सकता है जबकि गलतफ़हमी को खत्म किया जा सकता है|

निष्कर्ष

गलती को हमेशा सुधार और सीख के अवसर से देखना चाहिए जबकि गलतफहमी इन्सान को अपने विचारो में कभी नहीं पालना चाहिए|




Reality of mistake and misunderstanding

Both the words of mistake and misunderstanding are completely different from each other. The mistake can be made by any person, but misunderstanding happens to some person. Mistake is a reality that needs to be rectified and the mistake can be rectified. While a misunderstanding is an idea, which a person takes and makes a big mistake. Misunderstandings often settle in the human mind in such a way that it is very difficult to remove them, until the reality of the misunderstanding is fully exposed to the human being and the human being is trapped in his own misunderstanding. Sometimes the misunderstanding also gets corrected, sometimes the misunderstanding also goes wrong. Misconceptions remain in the human mind in many ways. The removal of which is in the hands of the person who has misunderstood. Mistake is that which does not justify the work, and misunderstanding is that which keeps bumping the thoughts of right or wrong in their thinking for a task.

Thought of ​​mistake and misunderstanding

He often makes mistakes in the life of a person. There are some mistakes that normally do not matter. But there are some mistakes which are seen abnormally. Which has a very deep impact on the life of a human being, but mistake is a lesson, by which a person takes a lesson. A person can learn a lesson from someone else's mistake. It is the mistake that prepares the work to be corrected. Misunderstanding is created by man himself in his fantasies. And the person is so immersed in that misunderstanding that he does not find a way to get out of it. Making mistakes is seen in the work of human beings, but misunderstanding is a thought that is thought in human thinking. Which if proved wrong is known as the word misunderstanding.

mistake

The mistake is called the one in which the work is not found right. A person does a lot of things in his daily life in which he is not right and it becomes a mistake for a person, which is thought to be done without thinking. Mistakes happen to any human being. There is no person in the world who does not make mistakes. If he makes a mistake, he gets a lesson that he himself got only on the mistake he has made.

misunderstanding

Misunderstanding is one such idea in the thinking of human being, which causes a person to misunderstand. In times of misunderstanding, a person also makes mistakes.

Human misunderstanding happens on many subjects. In times of misunderstanding, humans also adopt violence. Whose loss he may have to suffer throughout his life.

Difference between mistake and misunderstanding

There is no existence of misunderstanding but there is a mistake made by him, which has a good or bad effect on that person. Mistake represents the outline of reality. While there is no reality of misunderstanding. Mistakes can also be felt by themselves or by someone else. Whereas misunderstanding is caused by the idea generated by itself or by another. Mistakes can be corrected while misunderstandings can be eliminated.

The conclusion

Mistake should always be seen with the opportunity of improvement and learning, whereas misunderstanding should never be borne by the person in his thoughts.

 

  

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